बढ़े हुए प्रोस्टेट के लिए लेज़र प्रोस्टेटेक्टॉमी गाइड: फ़ायदे, रिकवरी और परिणाम
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लेजर प्रोस्टेटेक्टॉमी (Laser Prostatectomy) एक आधुनिक और कम इनवेसिव सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका उपयोग आमतौर पर बढ़े हुए प्रोस्टेट यानी Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) के इलाज में किया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ कई पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बड़ी हो जाती है, जिससे पेशाब की नली पर दबाव पड़ता है और पेशाब से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठकर पेशाब जाना, पेशाब शुरू करने में कठिनाई, धीमी धार, रुक-रुक कर पेशाब आना, पेशाब पूरा न निकलने का अहसास और बार-बार यूरिन इन्फेक्शन शामिल हो सकते हैं।
लेजर प्रोस्टेटेक्टॉमी में विशेष लेजर ऊर्जा की मदद से प्रोस्टेट के उस अतिरिक्त ऊतक को हटाया या कम किया जाता है, जो पेशाब के रास्ते को ब्लॉक कर रहा होता है। HoLEP जैसी लेजर तकनीकें बड़े प्रोस्टेट में भी प्रभावी मानी जाती हैं और कई मरीजों में बेहतर यूरिन फ्लो, कम रक्तस्राव और तेजी से रिकवरी में मदद कर सकती हैं। हालांकि, हर मरीज के लिए उपचार का चुनाव प्रोस्टेट के आकार, लक्षणों की गंभीरता, उम्र, अन्य बीमारियों और डॉक्टर की जांच पर निर्भर करता है।
पेस हॉस्पिटल्स के पॉडकास्ट में डॉ. अभिक देबनाथ, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट, एंडोयूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन, लेजर प्रोस्टेटेक्टॉमी के बारे में सरल भाषा में जानकारी देते हैं। इस एपिसोड में वे बताते हैं कि बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षण क्या हैं, कब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, लेजर प्रोस्टेट सर्जरी कैसे की जाती है और उपचार के बाद मरीज को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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